Love - Romantic SMS [Ghazals SMS]

Added 7 months ago

"प्यार की गज़लो को तराना मिल गया.

आपकी दोस्ती ऐसी मिली दोस्त...

जैसे खुदा की तरफ से कोई नज़राना मिल गया...

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Added 7 months ago

"युँही बे सबाब ना फिरा करो,
कोई शाम घर भी रहा करो..
वो गज़ल की सच्ची किताब है,
उसे छुपके-छुपके पड़ा करो..
मुझे इश्तिहार सी लगती हैं..
ये महोब्बतों की कहनीयाँ..
जो सुना नहीं वो कहा करो..
जो कहा नहीं वो सुना करो.

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Added 2 years ago

Ghalib
Sharab Peeny De Masjid Me Beth Kar
Ya Wo Jagah Bata Jahan Khuda Nahi

Iqbal
Masjid Khuda Ka Ghar Hai Peeny Ki Jagah Nahi
Kafir K Dil Me Ja Wahan Khuda Nahi

Faraz
Kafir K Dil Se Aya Hun Me Ye Dekh Kar
Khuda Mojood Hai Wahan Par Usy Pata Nahi

Wasi
Khuda To Mojood Duniya Me Har Jagah
Tu Jannat Me Ja Wahan Peena Mana Nahi

Saqi
Peeta Hun Gham-e-Duniya Bhulany K Liye Saqi
Jannat Me Kon Sa Gham Hai Is Liye Wahan Peeny Me Maza Nahi...

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Added 2 years ago

हाँ ज़माना भी मुझे अब गैर कहता है,
मेरे शब्दों की मोहब्बत को वो शेर कहता है,

पता है न तुम्हे जब भी हम कुछ गुनगुनाते थे,
वो उन बीती यादो को ज़ख़्म का ढेर कहता है,

तमामें गुजरा वक़्त ऐसा के फिर वो लौट न पाया,
तेरे जाने की स्र्ख़सत को वो किस्मत का फेर कहता है,

खता क्या की थी जो हमने भी, एक ख्वाब देखा था,
मगर ये ख्वाब को भी वो काँटों का पेड़ कहता है,

बहुत ढूंढा तुझे मैंने ज़माने से यूँ छुप –छुपकर,
मेरे जज्बात को भी वो गले की टेर कहता है…

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Added 2 years ago

मेरे प्यार मे क्या कमी रह गई
मेरी तन्हा-सी क्यों जिन्दगी रह गई

बहुत मिन्नतें की तुम्हारे लिए
अधूरी मगर आरजू रह गई

बहुत आरजू थी तेरे प्यार की
मगर आँख में बस नमी रह गई

भुलाने की कोशिश बहुत हमने की
मगर याद दिल मे बसी रह गई

अब कभी भी न मिल पाउगा मै तुम्हें
तू जुदा थी जुदा है जुदा रह गई

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Added 2 years ago

जख़्म दिल के हरे हरे से रहते हैं
सभी अरमान भरे-भरे से रहते हैं

शराफ़त ही होता है जिन लोगों का ईमां
न जाने क्यों डरे-डरे से रहते हैं

बड़ा मुश्किल है सह पाना सच्चे इंसां को
ऐसे आदमी से लोग परे-परे रहते हैं

बस गये हैं इतने ग़म दिल में
इसलिये तो हम भरे-भरे से रहते हैं

मिल ना पाई कोई ऐसी बस्ती हमें
जहां पर बाशिंदे खरे-खरे से रहते हैं

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Added 2 years ago

शैतानियाँ दुहरानें को आ
मुझे मुझसे मिलानें को आ
साँसें बिन तेरे तन्हा हैं
फिर से मुझे गले लगानें को आ

हर-वक्त ज़िंदा मुझमें तू हैं
किसी बहानें ये समझानें को आ
सफर में ऐसे ही कैसे चलेगा
दो कदम तो साथ निभानें को आ
मुझमें तस्वीर तेरा तस्व्वुर हैं
मेरे इन ख्वाब को सजानें को आ
आ फिर से सब ये दुहरानें को आ
फिर से मुझे गले लगानें को आ

थक चुका हूँ बहोत मैं यूं
निगाहों से ही कुछ पिलानें को आ
क्यूं कैसी और क्या हैं तेरी मजबूरी
कब तक रहूँ यूहीं यही बतानें को आ
कुछ और करीब आनें को आ
मेरें सीनें में अब समानें को आ

शैतानियाँ दुहरानें को आ
मुझे मुझसे मिलानें को आ

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